Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 24 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 24

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 24
Shloka
सत्त्वं रजस्तमश्चैव त्रीन्विद्यादात्मनो गुणान्। यैर्व्याप्येमान्स्थितो भावान्महान्सर्वानशेषतः॥

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Subject
सत्त्व, रज, तम-गुणों का परिचय
Meaning
(सत्त्वं रजः च तमः एव त्रीन् आत्मनः गुरगान् विद्यात्) सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण इन तीनों को ग्रात्मा को प्रभावित करनेवाले, प्रकृति के गुण समझे, (महान्) महत्तत्त्व = [अव्यक्त प्रकृति १ | १५ ] (यै :) इन तीन गुणों से (अशेषतः) बिना किसी पदार्थ को छोड़े (इमान् सर्वान् भावान् व्याप्य स्थितः) इन समस्त पदार्थों को व्याप्त करके स्थित है॥२४॥