Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 125 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 125

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 125
Shloka
एवं यः सर्वभूतेषु पश्यत्यात्मानं आत्मना। स सर्वसमतां एत्य ब्रह्माभ्येति परं पदम्॥

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Meaning
(एवम्) इसी प्रकार समाधियोग से (य:) जो मनुष्य (सर्वभूतेषु आत्मना आत्मानं पश्यति) सव प्राणियों में परमेश्वर को देखता है (स: सर्वसनताम् + एत्य) वह सबको अपने आत्मा के समान प्रेमभाव से देखता है (परं पदं ब्रह्मअभ्येति) वही परमपद जो ब्रह्म-परमात्मा है उसको यथावत् प्राप्त होके सदा प्रानन्द को प्राप्त होता है ॥१२५॥