Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 124 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 124

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 124
Shloka
एष सर्वाणि भूतानि पञ्चभिर्व्याप्य मूर्तिभिः। जन्मवृद्धिक्षयैर्नित्यं संसारयति चक्रवत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(एषः) यह परमात्मा (पञ्चभिः मूर्तिभिः सर्वाणि भूतानि व्याप्य) पञ्चमहाभूतों से सब प्राणियों को युक्त करके अर्थात् उनकी उत्पत्ति करके (जन्मवृद्धि-क्षय: नित्यं चक्रवत् संसारयति) उत्पत्ति, वृद्धि और विनाश करते हुए सदा चक्र की तरह संसार को चलाता रहता है॥१२४॥