Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 122 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 122

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 122
Shloka
प्रशासितारं सर्वेषां अणीयांसं अणोरपि। रुक्माभं स्वप्नधीगम्यं विद्यात्तं पुरुषं परम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(सर्वेषां प्रशासितारम्) जो सबको शिक्षा देने हारा, (अरणो:+अपि अणीयांसम्) सूक्ष्म से सूक्ष्म, (रुक्माभम्) स्वप्रकाश स्वरूप, (स्वप्नधीगम्यम्) समाधिस्थ बुद्धि से जानने योग्य है, (तं परं पुरुषं विद्यात्) उसको परम पुरुष जानना चाहिए ॥१२२॥(स० प्र० प्रथम समु०)