Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 119 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 119

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
12/119
Adhyay 12 Shloka 119
Shloka
आत्मैव देवताः सर्वाः सर्वं आत्मन्यवस्थितम्। आत्मा हि जनयत्येषां कर्मयोगं शरीरिणाम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(म + एव सर्वाः देवताः) आत्मा अर्थात् परमेश्वर ही सव व्यवहार के पूर्वोक्त देवताओं को रचनेवाला, (सर्वम् + आत्मनि+अवस्थितम्) और जिसमें सब जगत् स्थित है, वही सब मनुष्यों का उपास्यदेव तथा (एषां शरीरिणां कर्मयोगं जनयति) सब जीवों को पाप-पुण्य के फलों का देने हारा है॥११९॥(द० ल० भ्रा० नि० १९६)