Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 118 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 118

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 118
Shloka
सर्वं आत्मनि संपश्येत्सच्चासच्च समाहितः। सर्वं ह्यात्मनि संपश्यन्नाधर्मे कुरुते मनः॥

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Subject
निःश्रेयस कर्मों के अन्त में उपसंहार
Meaning
(समाहितः) जो सावधान पुरुष (असत् च सत् च सर्वम्) असत्कारण और सत्कार्यरूप जगत् को (आत्मनि संपश्येत्) आत्मा अर्थात् सर्वव्यापक परमेश्वर में देखे, (मनः न कुरुते) वह कभी अपने मन को अधर्मंयुक्त नहीं कर सकता, (हि) क्योंकि (सर्वम् आत्मनि संपश्यन्) वह परमेश्वर को सर्वज्ञ जानता है॥११८॥(द० ल० भ्रा० नि० १९६)