Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 112 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 112

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 112
Shloka
ऋग्वेदविद्यजुर्विच्च सामवेदविदेव च। त्र्यवरा परिषज्ज्ञेया धर्मसंशयनिर्णये॥

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Meaning
(च) तथा (ऋग्वेदवित् यजुर्वेदवित् च सामवेदवित् एव) ऋग्वेदवित्, यजुर्वेदवित् और सामवेदवित् (त्रि + अवरा धर्मसंशयनिर्णये परिषत् ज्ञेया) इन तीनों विद्वानों की भी सभा धर्मसंशय अर्थात् सब व्यवहारों के निर्णय के लिए होनी चाहिए॥११२॥(सं० वि० गृहाश्रम प्र०)