Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 111 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 111

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 111
Shloka
त्रैविद्यो हेतुकस्तर्की नैरुक्तो धर्मपाठकः। त्रयश्चाश्रमिणः पूर्वे परिषत्स्याद्दशावरा॥

Bhashya

Meaning
(दशावरा परिषत् स्यात्) उन दशों में इस प्रकार के विद्वान होवें(त्रैविद्यः) तीन वेदों के विद्वान् (हेतुकः) चौथा हेतुक अर्थात् कारण-प्रकारण का ज्ञाता, (तर्की) पांचवां-तर्की= न्यायशास्त्रवित, (नैरुक्तः) छठा-निरुक्त का जानने हारा, (धर्मशास्त्रवित्) सातवां - धर्मशास्त्रवित् (त्रयः च पूर्वे आश्रम:) आठवां-ब्रह्मचारी, नववां-गृहस्थ, और दशवां वानप्रस्थ, इन महात्माओं की सभा होवे ॥१११॥(सं० वि० गृहाश्रम प्र०)