Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 110 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 110

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 110
Shloka
दशावरा वा परिषद्यं धर्मं परिकल्पयेत्। त्र्यवरा वापि वृत्तस्था तं धर्मं न विचालयेत्॥

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Subject
दश विद्वानों की धर्मनिरर्णायक परिषद्
Meaning
(दशावरा वृत्तस्था वा त्रि+अवरा परिषद्) न्यून से न्यून दश विद्वानों अथवा बहुत न्यून हों तो तीन विद्वानों की सभा (यं धर्म परिकल्पयेत्) जैसी व्यवस्था करे, (तं धर्मं न विचालयेत्) उस धर्म अर्थात् व्यवस्था का उल्लंघन कोई भी न करे॥११०॥(स० प्र० षष्ठ समु०)