Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 106 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 106

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 106
Shloka
आर्षं धर्मोपदेशं च वेदशास्त्राविरोधिना। यस्तर्केणानुसंधत्ते स धर्मं वेद नेतरः॥

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Meaning
(य:) जो मनुष्य (आर्ष धर्मोपदेशम्) ऋषिविहित धर्मोपदेश अर्थात् धर्मशास्त्र का (वेदशास्त्र-अविरोधिना तर्केरण अनुसंधत्ते) वेदशास्त्र के अनुकूल तर्क के द्वारा अनुसंधान करता है (सः धर्मं वेद न + इतरः) वही धर्म के तत्त्व को समझ पाता है, अन्य नहीं॥१०६॥