Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 105 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 105

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 105
Shloka
प्रत्यक्षं चानुमानं च शास्त्रं च विविधागमम्। त्रयं सुविदितं कार्यं धर्मशुद्धिं अभीप्सता॥

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1 Bhashyas
Subject
धर्म का वर्णन
Meaning
(धर्मशुद्धिम् + अभीप्सता) धर्म के तत्त्व को जानने के अभिलाषी मनुष्य को (प्रत्यक्षम् अनुमानं च विविधागमं शास्त्रम्) प्रत्यक्ष अनुमान और विविध वेदमूलक शास्त्र, (त्रयं सुविदितं कार्यम्) इन तीनों का अच्छी प्रकार ज्ञान प्राप्त करना चाहिये ॥१०५॥