Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 104 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 104

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

126 Shloka
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Adhyay 12 Shloka 104
Shloka
तपो विद्या च विप्रस्य निःश्रेयसकरं परम्। तपसा किल्बिषं हन्ति विद्ययामृतं अश्नुते॥

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1 Bhashyas
Subject
तप और विद्या का वर्णन
Meaning
(विप्रस्य) विप्र के लिए (तपः च विद्या) तप= श्रेष्ठव्रतों की साधना, और विद्या= सत्यविद्याओं का ज्ञान, ये दोनों (परं निश्रेयसकरम्) उत्तम मोक्षसाधन हैं, वह विप्र (तपसा किल्विषं हन्ति) तप से पापभावना को नष्ट करता है, और (विद्यया + अमृतम् +अश्नुते) सत्यविद्याओं के ज्ञान से अमरता को प्राप्त करता है ॥१०४॥