Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 102 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 102

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 102
Shloka
वेदशास्त्रार्थतत्त्वज्ञो यत्र तत्राश्रमे वसन्। इहैव लोके तिष्ठन्स ब्रह्मभूयाय कल्पते॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(वेदशास्त्रार्थतत्त्वज्ञः) वेदशास्त्र के अर्थतत्त्व का ज्ञाता विद्वान् (यत्रतत्र आश्रमे वसन्) किसी भी आश्रम में रहता हुआ, (इह + इव लोके तिष्ठन्) इसी वर्तमान जन्म से ही (ब्रह्मभूयाय कल्पते) ब्रह्मप्राप्ति के लिए अधिकाधिक समर्थ हो जाता है ॥१०२॥