Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 101 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 101

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 101
Shloka
यथा जातबलो वह्निर्दहत्यार्द्रानपि द्रुमान्। तथा दहति वेदज्ञः कर्मजं दोषं आत्मनः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(यथा) जैसे (जातबल: वह्निः) धधकती हुई आग (आन्दुमान् अपि दहति) गीले वृक्षों को भी जला देती है (तथा) उसी प्रकार (वेदज्ञः) वेदों का ज्ञाता विद्वान् (आत्मनः कर्मजं दोषं दहति) अपने कर्मों से उत्पन्न होने वाले संस्कार-दोषों को जला देता है अर्थात् वेदज्ञान रूपी अग्नि से दुष्ट संस्कारों को मिटाकर आत्मा को पवित्र रखता है ॥१०१॥