Adhyay 12

Manusmriti

Shloka 100 Chapter Twelve

Adhyay 12
Shloka 100

Chapter Twelve

Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन

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Adhyay 12 Shloka 100
Shloka
सेनापत्यं च राज्यं च दण्डनेतृत्वं एव च। सर्वलोकाधिपत्यं च वेदशास्त्रविदर्हति॥

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1 Bhashyas
Meaning
(सैनापत्यम्) सब सेना (च) और (राज्यम्) सेनापतियों के ऊपर राज्याधिकार, (दण्डनेतृत्वम् + एव) दंड देने की व्यवस्था के सब कार्यों का आधिपत्य, (च) और (सर्वलोक-आधिपत्यम्) सब के ऊपर वर्तमान सर्वाधीश राज्याधिकार, इन चारों अधिकारों में (वेदशास्त्रवित् +अर्हति) सम्पूर्ण वेदशास्त्रों में प्रवीण, पूर्णविद्या वाले, धर्मात्मा, जितेन्द्रिय, सुशील जनों को स्थापित करना चाहिए अर्थात् मुख्य सेनापति, मुख्य राज्याधिकारी, मुख्य न्यायाधीश, और प्रधान राजा, ये चार सब विद्याओं में पूर्ण विद्वान् होने चाहिएँ । ॥१००॥(स० प्र० षष्ठसमु०)