Adhyay 12
Shloka 1
Shloka
चातुर्वर्ण्यस्य कृत्स्नोऽयं उक्तो धर्मस्त्वयानघः। कर्मणां फलनिर्वृत्तिं शंस नस्तत्त्वतः पराम्॥
Shloka 1 Chapter Twelve
Subject: कर्मफल - विधान एवं निःश्रेयस कर्मों का वर्णन
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