Meaning
('प्रायः' नाम तपः प्रोक्तम्) 'प्रायः' तप को कहते हैं और ('चित्तं' निश्चयः उच्यते) 'चित्त' निश्चय को कहते हैं (तपः - निश्चयसंयुक्तं 'प्रायश्चित्तम्' इति स्मृतम्) तप और निश्चय का संयुक्त होना ही 'प्रायश्चित्त' कहलाता है॥४७।। चरितव्यमतो नित्यं प्रायश्चित्तं विशुद्धये । निन्द्येहि लक्षणैयुक्ता जायन्तेऽनिष्कृतैनसः॥५३॥(५) (अतः) इसलिए (विशुद्धये) संस्कारों की शुद्धि के लिए (नित्यं प्रायश्चित्तं चरितव्यम्) सदा [बुरा काम होने पर] प्रायश्चित्त करना चाहिए, (हि) क्योंकि (अनिष्कृत-एनसः) पापशुद्धि किये विना मनुष्य (निन्द्यैः लक्षणः युक्ता: जायन्ते) निन्दनीय लक्षणों से युक्त हो जाते हैं या मरकर पुनर्जन्म में होते हैं॥५३॥