Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 46 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 46

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
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Adhyay 11 Shloka 46
Shloka
अकामतः कृतं पापं वेदाभ्यासेन शुध्यति। कामतस्तु कृतं मोहात्प्रायश्चित्तैः पृथग्विधैः॥

Bhashya

Meaning
(अकामत: कृतं पापम्) अनिच्छापूर्वक किया गया पाप (वेदाभ्यासेन शुध्यति) वेदाभ्यास से शुद्ध होता है- पाप के संस्कार नष्ट होकर प्रात्मा पवित्र होती है (मोहात् कामतः तु कृतम्) आसक्ति में इच्छापूर्वक किया गया पाप (पृथविधैः प्रायश्चित्तंः) अनेक प्रकार के प्रायश्चित्तों के करने से शुद्ध होता है॥४६॥