Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 44 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 44

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
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Adhyay 11 Shloka 44
Shloka
अकुर्वन्विहितं कर्म निन्दितं च समाचरन्। प्रसक्तश्चेन्द्रियार्थेषु प्रायश्चित्तीयते नरः॥

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1 Bhashyas
Subject
प्रायश्चित्त सम्वन्धी विधान—
Meaning
(विहितं कर्म अकुर्वन्) शास्त्र में विहित कर्मों [यज्ञोपवीत संस्कार वेदाभ्यास (११.१९१-१९२), संध्योपासन, यज्ञ आदि] को न करने पर, (निन्दितं समाचरन्) शास्त्र में निन्दित माने गये कार्यो [बुरे कर्मों से धनसंग्रह (११।१६३) मद्यपान, हिंसा आदि] को करने पर (च) और (इन्द्रिय-प्रर्थेषु प्रसक्तः) इन्द्रियविषयों में अत्यन्त प्रासक्त होने [ काम, क्रोध, मोह में आसक्त होने] पर (नरः प्रायश्चित्तीयते) मनुष्य प्रायश्चित्त के योग्य होता है॥४४॥