Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 265 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 265

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
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Adhyay 11 Shloka 265
Shloka
आद्यं यत्त्र्यक्षरं ब्रह्म त्रयी यस्मिन्प्रतिष्ठिता। स गुह्योऽन्यस्त्रिवृद्वेदो यस्तं वेद स वेदवित्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
और, (यत् त्रि + अक्षरम् आद्यं ब्रह्म) जो तीन प्रक्षरों वाले प्रमुख नाम 'ओ३म्' से उच्चरित होने वाला सबका आदिमूल परमेश्वर है, (यस्मिन् त्रयी प्रतिष्ठिता) जिसमें तीनों वेदविद्याएं प्रतिष्ठित हैं, (सः अन्यः गुह्यः त्रिवृत्वेदः) वह भी एक गुप्त अर्थात् अदृश्य-सूक्ष्म 'त्रिवृत्वेद' है (यः तं वेद सः वेदवित्) जो उसको जानता है, वह 'वेदवेत्ता' कहलाता है ॥२६५॥