Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 263 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 263

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
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Adhyay 11 Shloka 263
Shloka
यथा महाह्रदं प्राप्य क्षिप्तं लोष्टं विनश्यति। तथा दुश्चरितं सर्वं वेदे त्रिवृति मज्जति॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(यथा) जैसे (क्षिप्तं लोष्टम्) फेंका हुआ ढेला (महाह्रदं प्राप्य विनश्यति) बड़े तालाब में गिरकर पिघलकर नष्ट हो जाता है (तथा) उसी प्रकार (त्रिवृति वेदे) तीन विद्याओं वाले वेदों के जानने पर (सर्वं दुश्चरितं मज्जति) सब बुरे. आचरण मनुष्य को प्रभावित नहीं करते॥२६३॥