Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 233 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 233

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
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Adhyay 11 Shloka 233
Shloka
यस्मिन्कर्मण्यस्य कृते मनसः स्यादलाघवम्। तस्मिंस्तावत्तपः कुर्याद्यावत्तुष्टिकरं भवेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(यस्मिन् कर्मणि कृते) जिस कर्म के करने पर (अस्य मनस: अलाघवं स्यात्) मनुष्य के मन में जितना भारीपन अर्थात् असन्तोष एवं प्रसन्नता होवे (तस्मिन्) उस कर्म में (यावत् तुष्टिकरं भवेत्) जितना तप करने से मन में सुप्रसन्नता एवं संतुष्टि हो जावे (तावत् तपः कुर्यात्) उतना ही तप करे, अर्थात् किसो पाप के करने पर मनुष्य के मन में जब तक ग्लानिरहित पर्ण संतुष्टि एवं प्रसन्नता न हो जाए तब तक स्वेच्छा से तप करता रहे॥२३३॥