Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 232 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 232

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
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Adhyay 11 Shloka 232
Shloka
अज्ञानाद्यदि वा ज्ञानात्कृत्वा कर्म विगर्हितम्। तस्माद्विमुक्तिं अन्विच्छन्द्वितीयं न समाचरेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(अज्ञानात् यदि वा ज्ञानात्) अज्ञान से अथवा जानबूजकर (विर्गाहतं कर्म कृत्वा) निन्दित कर्म करके (तस्मात् विमुक्तिम् + ग्रन्विच्छन्) मनुष्य उस पापप्रवृत्ति से छुटकारा पाने के लिए (द्वितीयं न समाचरेत्) दुबारा पाप न करे [ तभी पाप-प्रवृत्ति से छुटकारा मिल सकता है, अन्यथा नहीं ।॥२३२॥