Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 229 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 229

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
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Adhyay 11 Shloka 229
Shloka
यथा यथा मनस्तस्य दुष्कृतं कर्म गर्हति। तथा तथा शरीरं तत्तेनाधर्मेण मुच्यते॥

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Meaning
और, (तस्य मनः यथा - यथा) उसका मन = आत्मा जैसे-जैसे (दुष्कृतं कर्म गर्हति) किये हुए पाप-अपराध को धिक्कारता है [ कि मैंने यह बुरा कार्य किया है आदि] (तथा तथा तत् शरीरम्) वैसे-वैसे उसका शरीर (तेन. अधर्मेण मुच्यते) उस अधर्म-अपराध से मुक्त = निवृत्त होता जाता है अर्थात् बुरे कर्म को बुरा मानकर उसके प्रति ग्लानि होने से शरीर और मन बुरे कार्य करने से निवृत्त होते जाते हैं॥२२९॥