Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 228 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 228

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
11/228
Adhyay 11 Shloka 228
Shloka
यथा यथा नरोऽधर्मं स्वयं कृत्वानुभाषते। तथा तथा त्वचेवाहिस्तेनाधर्मेण मुच्यते॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(अधर्मं कृत्वा) अधर्मयुक्त आचरण करके (नरः) मनुष्य (यथा - यथा स्वयम् अनुभाषते) जैसे-जैसे अपने पाप को लोगों से कहता है (तथा तथा अहि त्वचा + इव) वैसे-वैसे सांप-केंचुली के समान (तेन + अधर्मेण मुच्यते) उस अधर्म से - अपराध से मुक्त होता जाता है अर्थात् लोगों में उसके प्रति अपराधी होने की भावना समाप्त होती जाती हैं॥२२८॥