Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 227 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 227

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
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Adhyay 11 Shloka 227
Shloka
ख्यापनेनानुतापेन तपसाध्ययनेन च। पापकृन्मुच्यते पापात्तथा दानेन चापदि॥

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Subject
प्रायश्चित्त विषय का उपसंहार
Meaning
(ख्यापनेन) अपनी त्रुटि और उसके लिये दुःख अनुभव करते हुए सर्वसाधारण के सामने किये हुए अपने दोष को कहने से [१११२२८] (अनुतापेन) पश्चात्ताप करने से [१११२२६-२३२] (तपसा) व्रतों [१११२२० – २२२.२३३] की साधना से, (अध्ययनेन) वेदाभ्यास से [१११२४५ - २४६] (पापकृत् पापात् मुच्यते) पाप करने वाला पाप-भावना से रहित हो जाता है (तथा) और (आपदि दानेन) आपद्ग्रस्त व्याधि, जरा आदि से पीड़ित अवस्था में अपराध होने पर (दानेन) परोपकारार्थ दान देने से भी पापभावना समाप्त होकर निष्पापता आती है॥२२७॥