Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 226 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 226

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
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Adhyay 11 Shloka 226
Shloka
एतैर्द्विजातयः शोध्या व्रतैराविष्कृतैनसः। अनाविष्कृतपापांस्तु मन्त्रैर्होमैश्च शोधयेत्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
मानस-पापों के प्रायश्चित्त की विधि
Meaning
(आविष्कृत-एनसः द्विजातयः) जिनका पाप क्रियारूप में प्रकट हो गया है, ऐसे द्विजातियों को (एतैः व्रतैः शोध्याः) इन पूर्वोक्त [१११२११-२२५] व्रतों से शुद्ध करें, और (अविष्कृतपापान्तु) जिनका पाप क्रिया रूप में प्रकट नहीं हुआ है अर्थात् अन्तःकरण में ही पाप भावना उत्पन्न हुई है, ऐसों को (मन्त्रैः च होमैः शोधयेत्) मन्त्र-जपों [११।२२५] और यज्ञों से शुद्ध करें अर्थात् मानसिक पापों की शुद्धि जपों एवं यज्ञों-संध्योपासन- अग्निहोत्र आदि से होती है ॥२२६॥