Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 222 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 222

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
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Adhyay 11 Shloka 222
Shloka
महाव्याहृतिभिर्होमः कर्तव्यः स्वयं अन्वहम्। अहिंसा सत्यं अक्रोधं आर्जवं च समाचरेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
प्रायश्चित्तकाल में (अन्वहम्) प्रतिदिन (स्वयम्) प्रायश्चित्तकर्ता को स्वयं (महाव्याहृतिभिः होमः कर्त्तव्यः) महाव्याहृतियों [भूः, भुवः स्वः आदि मन्त्रों] से हवन करना चाहिए (च) और (अहिंसा-सत्यम्-प्रोध-आर्जवं समाचरेत्) अहिंसा, सत्य, क्रोधरहित रहना, कुटिलता न करना, इन बातों का पालन करे ॥२२२॥