Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 216 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 216

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
11/216
Adhyay 11 Shloka 216
Shloka
एकैकं ह्रासयेत्पिण्डं कृष्णे शुक्ले च वर्धयेत्। उपस्पृशंस्त्रिषवणं एतच्चाण्द्रायणं स्मृतम्॥

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1 Bhashyas
Subject
चान्द्रायणव्रत की विधि
Meaning
[पूर्णिमा के दिन पूरे दिन में १५ ग्रास भोजन करके फिर.] (कृष्णे एकएकं पिण्डं ह्रासयेत्) कृष्णपक्ष में एक-एक ग्रास भोजन प्रतिदिन कम करता जाये, [ इस प्रकार करते हुए अमावस्या को पूर्ण उपवास रहेगा, फिर शुक्लपक्ष प्रतिपदा को पूरे दिन में एक ग्रास भोजन करके ] (शुक्ले वर्धयेत्) शुक्लपक्ष ग्रास भोजन पूरे दिन में बढ़ाता जाये, इस प्रकार करते हुए (त्रिषवरणम् + उपस्पृशन्) तीन समय स्नान करे, (एतत् चान्द्रायणं स्मृतम्) यह 'चान्द्रायण' व्रत कहाता है ।। २१६ ।। में एक-एक