Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 214 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 214

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
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Adhyay 11 Shloka 214
Shloka
तप्तकृच्छ्रं चरन्विप्रो जलक्षीरघृतानिलान्। प्रतित्र्यहं पिबेदुष्णान्सकृत्स्नायी समाहितः॥

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1 Bhashyas
Subject
चान्द्रायण व्रत की विधि
Meaning
(तप्तकृच्छ्र चरन् विप्रः) 'तप्तकृच्छु' व्रत को करने वाला द्विज (उष्णान् जल-क्षीर-घृत-अनिलान् प्रतिव्यहं पिवेत्) गर्म पानी, गर्मंदूध, गर्मं घी और वायु प्रत्येक को तीन-तीन दिन पीकर रहे, और (सकृत्स्नायी) एक बार स्नान करें, तथा (समाहितः) एकाग्रचित्त रहे । २१४ ।।