Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 213 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 213

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
11/213
Adhyay 11 Shloka 213
Shloka
एकैकं ग्रासं अश्नीयात्त्र्यहाणि त्रीणि पूर्ववत्। त्र्यहं चोपवसेदन्त्यं अतिकृच्छ्रं चरन्द्विजः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
प्रतिकृच्छ व्रत की विधि -
Meaning
(अतिकृच्छ्र चरन् द्विजः) 'प्रतिकृच्छ्र' नामक व्रत को करने वाला द्विज (पूर्ववत्) पूर्व विधि [११ | २११] के अनुसार (त्रि+हारिण त्रीरिण) तीन दिन केवल प्रातःकाल, तीन दिन केवल सायंकाल, तीन दिन बिना मांगे प्राप्तहुआ (एक-एकं ग्रासम् + प्रश्नीयात्) एक-एक ग्रास भोजन करे (अन्त्यं त्रि + ग्रहं च + उपवसेत्) और अन्तिम तीन दिन उपवास रखे । [यह 'अतिकृच्छ्र' व्रत है ]॥२१३॥