Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 212 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 212

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
11/212
Adhyay 11 Shloka 212
Shloka
गोमूत्रं गोमयं क्षीरं दधि सर्पिः कुशोदकम्। एकरात्रोपवासश्च कृच्छ्रं सांतपनं स्मृतम्॥

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Subject
कृच्छ व्रत की विधि
Meaning
क्रमश: एक-एक दिन (गोमूत्रं गोमयं क्षीरं दधिः सपि: कुश + उदकम्) गोमूत्र, गोबर का रस, गौदूध, गौ के दूध का दही, गोघृत और कुशा-दर्भ से उबला जल, इनका भोजन करे (च) और (एकरात्र उपवास:) फिर एक दिनरात का उपवास रखे, यह (कृच्छ्र-सांतपनं स्मृतम्) 'कृच्छ्र सांतपन' नामक व्रत है॥२१२॥