Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 211 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 211

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
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Adhyay 11 Shloka 211
Shloka
त्र्यहं प्रातस्त्र्यहं सायं त्र्यहं अद्यादयाचितम्। त्र्यहं परं च नाश्नीयात्प्राजापत्यं चरन्द्विजः॥

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1 Bhashyas
Subject
प्राजापत्य व्रत की विधि
Meaning
(प्राजापत्यं चरन् द्विजः) 'प्राजापत्य' नामक व्रत का पालन करने वाला द्विज (त्रि + ग्रहं प्रातः) पहले तीन दिन प्रातःकाल हो, (त्रि + ग्रहं सायम्) फिर तीन दिन केवल सायंकाल, (त्रि + अहम् अयाचितम् अद्यात्) उसके पश्चात् तीन दिन बिना मांगे जो मिले उसका ही भोजन करे (च) और (परं त्रि + अहं न अश्नीयात्) उसके बाद फिर तीन दिन उपवास रखे । [यह प्राजापत्य व्रत है ]॥२११॥