Adhyay 11

Manusmriti

Shloka 162 Chapter Eleven

Adhyay 11
Shloka 162

Chapter Eleven

Subject: प्रायश्चित विषय

266 Shloka
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Adhyay 11 Shloka 162
Shloka
धान्यान्नधनचौर्याणि कृत्वा कामाद्द्विजोत्तमः। स्वजातीयगृहादेव कृच्छ्राब्देन विशुध्यति॥

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1 Bhashyas
Subject
निन्दित कर्म करने वालों का प्रायश्चित्त
Meaning
(विकर्मस्थाः तु ये द्विजाः) निन्दित कर्म करने पर जो उपनयनयुक्त द्विज (प्रायश्चित्तं चिकीर्षन्ति) प्रायश्चित्त करके अपने को शुद्ध करना चाहते हैं (च) और (ब्रह्मणा परित्यक्ताः) वेदादि के त्यागने पर जो प्रायश्चित्त करके शुद्ध होना चाहते हैं (तेषाम्+अपि + एतत् + आदिशेत्) उन्हें भो पूर्वोक्त व्रत [११ । १६१] करने को कहें॥१६२॥