Adhyay 10

Manusmriti

Shloka 65 Chapter Ten

Adhyay 10
Shloka 65

Chapter Ten

Subject: चातुर्वर्ण्य धर्मान्तर्गत वैश्य-शुद्र के धर्म एवं चातुर्वर्ण्य धर्म का उपसंहार

131 Shloka
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Adhyay 10 Shloka 65
Shloka
शूद्रो ब्राह्मणतां एति ब्राह्मणश्चैति शूद्रताम्। क्षत्रियाज्जातं एवं तु विद्याद्वैश्यात्तथैव च॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
कर्मानुसार वर्णपरिवर्तन -
Meaning
[प्रश्रेष्ठ कर्मों के अनुसार ही-] (शूद्रः ब्राह्मणताम् + एति) शूद्र ब्राह्मण (च) और (ब्राह्मणः शूद्रताम् + एति) ब्राह्मण शूद्र हो जाता है अर्थात् गुरणकर्मों के अनुकूल ब्राह्मण हो तो ब्राह्मण रहता है तथा जो ब्राह्मरण क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र के गुरण वाला हो तो वह क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र हो जाता है। वैसे शुद्र भो मुर्ख हो तो वह शूद्र रहता और जो उत्तम गुणयुक्त हो तो यथायोग्य ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य हो जाता है (क्षत्रियात् जातम् +एवं तु तथैव वैश्यात् विद्यात्) वैसे ही क्षत्रिय और वैश्य के विषय में भी जान लेना॥६५॥ (ऋ० भा० भू० पठनपा०) . .