Adhyay 10

Manusmriti

Shloka 58 Chapter Ten

Adhyay 10
Shloka 58

Chapter Ten

Subject: चातुर्वर्ण्य धर्मान्तर्गत वैश्य-शुद्र के धर्म एवं चातुर्वर्ण्य धर्म का उपसंहार

131 Shloka
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Adhyay 10 Shloka 58
Shloka
अनार्यता निष्ठुरता क्रूरता निष्क्रियात्मता। पुरुषं व्यञ्जयन्तीह लोके कलुषयोनिजम्॥

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Meaning
(अनार्यता) प्रश्रेष्ठ व्यवहार (निष्ठुरता) स्वभाव की कठोरता-उजड्डता (क्रूरता) क्रूरता (निष्क्रियात्मता) धार्मिक क्रियाओं [यज्ञ आदि] के प्रति उपेक्षाभाव =न करने की भावना, ये लक्षण (लोके) लोक में (पुरुषं कलुषयोनिजं व्यञ्जयन्ति) पुरुष के दुष्ट प्रवृत्ति या अनार्य होने को सूचित करते हैं कि यह आर्यवर्णों के अन्तर्गत नहीं है॥५८॥