Adhyay 10

Manusmriti

Shloka 57 Chapter Ten

Adhyay 10
Shloka 57

Chapter Ten

Subject: चातुर्वर्ण्य धर्मान्तर्गत वैश्य-शुद्र के धर्म एवं चातुर्वर्ण्य धर्म का उपसंहार

131 Shloka
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Adhyay 10 Shloka 57
Shloka
वर्णापेतं अविज्ञातं नरं कलुषयोनिजम्। आर्यरूपं इवानार्यं कर्मभिः स्वैर्विभावयेत्॥

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1 Bhashyas
Subject
दस्युओं की पहचान
Meaning
(वर्ण-अपेतम्) वर्णों से बहिष्कृत या वर्णदीक्षा से रहित (आर्यरूपम् + इव + अनार्थम्) श्रेष्ठ रूप में होते हुए किन्तु वास्तव में अनार्य, (कलुषयोनिजम्) दुष्ट प्रवृत्ति वाले (अविज्ञातं नरम्) अपरिचित व्यक्ति को (स्वैः कर्मभिः विभावयेत्) उसके अपने कर्मों से जानले॥५७॥