Adhyay 10

Manusmriti

Shloka 45 Chapter Ten

Adhyay 10
Shloka 45

Chapter Ten

Subject: चातुर्वर्ण्य धर्मान्तर्गत वैश्य-शुद्र के धर्म एवं चातुर्वर्ण्य धर्म का उपसंहार

131 Shloka
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Adhyay 10 Shloka 45
Shloka
मुखबाहूरुपज्जानां या लोके जातयो बहिः। म्लेच्छवाचश्चार्यवाचः सर्वे ते दस्यवः स्मृताः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
चारों वर्गों से भिन्न व्यक्तियों की संज्ञा
Meaning
(लोके) लोक में (मुख-बाहु + उरु-पत्-जानाम्) ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र इन चार वर्णों से (बहिः) कर्त्तव्यपालन न करने के कारण वहिष्कृत या इनमें अदीक्षित (या जातयः) जो जातियां हैं (म्लेच्छवाचः च आर्यवाच:) चाहे वे म्लेच्छभाषाएं बोलती हैं या आर्यभाषाएं (ते सर्वे) वे सब (दस्यवः स्मृताः) 'दस्यु' कहलाती हैं॥४५॥