Adhyay 10

Manusmriti

Shloka 4 Chapter Ten

Adhyay 10
Shloka 4

Chapter Ten

Subject: चातुर्वर्ण्य धर्मान्तर्गत वैश्य-शुद्र के धर्म एवं चातुर्वर्ण्य धर्म का उपसंहार

131 Shloka
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Adhyay 10 Shloka 4
Shloka
ब्राह्मणः क्षत्रियो वैश्यस्त्रयो वर्णा द्विजातयः। चतुर्थ एकजातिस्तु शूद्रो नास्ति तु पञ्चमः॥

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1 Bhashyas
Meaning
[ आर्यों के समाज में ] (ब्राह्मणः क्षत्रियः वैश्यः) ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य (त्रयः वर्णाः द्विजातयः) ये तीन वर्ण विद्याध्ययन रूपी दूसरा जन्म प्राप्त करने वाले [२।१४६-१४८, इस संस्करण में २११२१ – १२३] हैं, प्रतः द्विज कहलाते हैं (चतुर्थ: एकजाति: शूद्रः) चौथा विद्याध्ययनरूपी दूसरा जन्म न होने के कारण एकजाति = जन्म वाला शूद्रवर्ण है (नास्ति तु पञ्चमः) पाचवाँ कोई वर्ण नहीं है॥४॥