Adhyay 10
Shloka 31
Shloka
प्रतिकूलं वर्तमाना बाह्या बाह्यतरान्पुनः। हीना हीनान्प्रसूयन्ते वर्णान्पञ्चदशैव तु॥
Shloka 31 Chapter Ten
Subject: चातुर्वर्ण्य धर्मान्तर्गत वैश्य-शुद्र के धर्म एवं चातुर्वर्ण्य धर्म का उपसंहार
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