Adhyay 10

Manusmriti

Shloka 131 Chapter Ten

Adhyay 10
Shloka 131

Chapter Ten

Subject: चातुर्वर्ण्य धर्मान्तर्गत वैश्य-शुद्र के धर्म एवं चातुर्वर्ण्य धर्म का उपसंहार

131 Shloka
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Adhyay 10 Shloka 131
Shloka
एष धर्मविधिः कृत्स्नश्चातुर्वर्ण्यस्य कीर्तितः। अतः परं प्रवक्ष्यामि प्रायश्चित्तविधिं शुभम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(एषः) यह [१ । १ से १० | १३० तक] (चातुर्वर्ण्यस्य) चारों वर्णों के व्यक्तियों का (कृत्स्न:) सम्पूर्ण (धर्मविधिः कीर्तितः) धर्मविधान कहा है | (अतः परम्) इसके बाद अब (शुभं प्रायश्चित्तविधि प्रवक्ष्यामि) शुभ प्रायश्चित्त की विधि को कहूँगा–॥१३१॥