Adhyay 10
Shloka 109
Shloka
प्रतिग्रहाद्याजनाद्वा तथैवाध्यापनादपि। प्रतिग्रहः प्रत्यवरः प्रेत्य विप्रस्य गर्हितः॥
Shloka 109 Chapter Ten
Subject: चातुर्वर्ण्य धर्मान्तर्गत वैश्य-शुद्र के धर्म एवं चातुर्वर्ण्य धर्म का उपसंहार
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