Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 91 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 91

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 91
Shloka
एकं एव तु शूद्रस्य प्रभुः कर्म समादिशत्। एतेषां एव वर्णानां शुश्रूषां अनसूयया॥
Pada
एकम्। एव। तु। शूद्रस्य। प्रभुः। कर्म। समादिशत्। एतेषाम्। एव। वर्णानां। शुश्रूषाम्। अनसूयया।

Bhashya

Subject
शूद्र के कर्म
Meaning
(प्रभुः) परमेश्वर ने (शुद्रस्य) जो विद्याहीन - जिसको पढ़ने से भी विद्या न आ सके, शरीर से पुष्ट, सेवा में कुशल हो, उस शुद्र के लिए (एतेषामेव वर्णानाम) इन ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तीनों वर्णों की (अनसूयया) निन्दा से रहित प्रीति से (शुश्रूषाम्) सेवा करना, (एकमेव कर्म) यही एक कर्म (समादिशत्) करने की आज्ञा दी है” ||९१||