Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 90 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 90

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
1/90
Adhyay 1 Shloka 90
Shloka
पशूनां रक्षणं दानं इज्याध्ययनं एव च। वणिक्पथं कुसीदं च वैश्यस्य कृषिं एव च॥
Pada
पशूनां। रक्षणं। दानम्। इज्या-अध्ययनम्। एव। च। वणिक्पथं। कुसीदं। च। वैश्यस्य। कृषिम्। एव। च।

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
वैश्य के कर्म
Meaning
(पशुरक्षा) गाय आदि पशुओं का पालन वर्धन करना, (दान) विद्याधर्म को वृद्धि करने कराने के लिए धनादि का व्यय करना (इज्या) अग्निहोत्रादि यज्ञों का करना (अध्ययन) वेदादि शास्त्रों का (वरिणकृपथ) सब प्रकार के व्यापार करना (कुसीद) एक सैंकड़े में चार, छः, आठ, बारह, सोलह वा बीस ग्रानों से अधिक व्याज और मूल से दूना अर्थात् एक रुपया दिया हो तो सौ वर्ष में भी दो रुपये से अधिक न लेना और न देना (कृषि) खेती करना (वैश्यस्य) ये वैश्य के कर्म हैं ||९०||