Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 89 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 89

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 89
Shloka
प्रजानां रक्षणं दानं इज्याध्ययनं एव च। विषयेष्वप्रसक्तिश्च क्षत्रियस्य समासतः॥
Pada
प्रजानां। रक्षणं। दानम्। इज्या-अध्ययनम्। एव। च। विषयेष्व्। अप्रसक्तिशु। च। क्षत्रियस्य। समासतः।

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
क्षत्रिग के कर्म
Meaning
दीर्घ ब्रह्मचर्य से (अध्ययनम्) साङ्गोपांग वेदादि शास्त्रों को यथावत् पढ़ना, (इज्या) अग्निहोत्र आादि यज्ञों का करना (दानम्) सुपात्रों को विद्या, सुवर्ण आदि और प्रजा को अभयदान देना, (प्रजानां रक्षणम्) प्रजाओं का सब प्रकार से सर्वदा यथावत् पालन करना (विषयेष्वप्रसक्तिः) विषयों में अनासक्त होके सदा जितेन्द्रिय रहना- लोभ, व्यभिचार, मद्यपानादि नशा आदि दुर्व्यसनों से पृथक् रहकर विनय सुशीलतादि शुभ कर्मों में सदा प्रवृत्त रहना ॥८९॥