Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 78 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 78

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 78
Shloka
ज्योतिषश्च विकुर्वाणादापो रसगुणाः स्मृताः। अद्भ्यो गन्धगुणा भूमिरित्येषा सृष्टिरादितः॥
Pada
ज्योतिषश्। च। विकुर्वाणाद्। आपो। रस-गुणाः। स्मृताः। अद्भयो। गन्ध-गुणा। भूमिर्। इत्येषा। सृष्टिर्। आदितः।

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Meaning
(च) और (ज्योतिष: विकुर्वाणात्) अग्नि के विकारोत्पादक अंश से (रसगुणा: आपः स्मृताः) 'रस' गुण वाला जल उत्पन्न होता है, और (अदुभ्यः) जल से (गन्धगुणा भूमि:) 'गन्ध' गुण वाली भूमि उत्पन्न होती है (इति एषा सृष्टि आदितः) यह इस प्रकार प्रारम्भ से लेकर [१ । १४ से] यहां तक वर्णित सृष्टि उत्पन्न होने की प्रक्रिया है॥७८॥