Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 74 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 74

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 74
Shloka
तस्य सोऽहर्निशस्यान्ते प्रसुप्तः प्रतिबुध्यते। प्रतिबुद्धश्च सृजति मनः सदसदात्मकम्॥
Pada
तस्य। सो। अहर्निशस्य-अन्ते। प्रसुप्तः। प्रतिबुध्यते। प्रतिबुद्धश्। च। सृजति। मनः। सद्-असद्-अत्मकम्।

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1 Bhashyas
Meaning
(प्रसुप्तः सः) वह प्रलय-अवस्था में सोया हुआ-सा [१ । ५२-५७] परमात्मा (तस्य अहर्निशस्य अन्ते) उस [१ | ६८-७२] दिन-रात के बाद (प्रति बुध्यते) जागता है= सृष्ट्य त्पत्ति में प्रवृत्त होता है (च) और (प्रतिबुद्ध:) जागकर (सद्-असदु-आत्मकम्) जो कारणरूप में विद्यमान रहे और जो विकारी अंश से कार्यरूप में विद्यमान रहे, ऐसे स्वभाव वाले (मनः) 'महत्' नामक प्रकृति के आद्य कार्यतत्त्व की (सृजति) सृष्टि करता है ॥७४॥