Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 73 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 73

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 73
Shloka
तद्वै युगसहस्रान्तं ब्राह्मं पुण्यं अहर्विदुः। रात्रिं च तावतीं एव तेऽहोरात्रविदो जनाः॥
Pada
तद्। वै। युगसहस्रान्तं। ब्राह्म। पुण्यम्। अहर्। विदुः। रात्रिं। च। तावतीम्। एव। ते। अहोरात्रविदो। जनाः।

Bhashya

Meaning
जो लोग (तत् युगसहस्रान्तं ब्राह्म पुण्यम् अहः) उस एक हजार दिव्ययुगों के परमात्मा के पवित्र दिन को (च) और (तावतीं एव रात्रिम्) उतने ही युगों की परमात्मा की रात्रि को (विदुः) समझते हैं (ते) वे ही (वै अहोरात्रविदः जनाः) वास्तव में दिन-रात = सृष्टि-प्रलय के काल के वेत्ता लोग हैं॥७३॥