Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 72 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 72

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 72
Shloka
दैविकानां युगानां तु सहस्रं परिसंख्यया। ब्राह्मं एकं अहर्ज्ञेयं तावतीं रात्रिं एव च॥
Pada
दैविकानां। युगानां। तु। सहस्रं। परिसंख्यया। ब्राह्मम्। एकम्। अहर्। ज्ञेयं। तावतीं। रात्रिम्। एव। च।

Bhashya

Subject
ब्रह्म के दिन-रात का परिमारण
Meaning
(दैविकानां युगानाम् तु) देवयुगों को (सहस्रं परिसंख्यया) हजार से गुणा करने पर जो कालपरिमाण निकलता है, जैसे- चार मानुषयुगों के दिव्यवर्ष १२००० होते हैं उनको हजार से गुरणा करने पर १,२०,००,००० दिव्यवर्षों का (ब्राह्मम्) परमात्मा का (एक अहः) एक दिन (च) और (तावतीं रात्रिम्) उतने ही दिव्यवर्षों की उसकी एक रात (ज्ञेयम्) समझनी चाहिए॥७२॥