Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 70 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 70

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 70
Shloka
इतरेषु ससंध्येषु ससंध्यांशेषु च त्रिषु। एकापायेन वर्तन्ते सहस्राणि शतानि च॥
Pada
इतरेषु। स-संध्येषु। स-संध्यांशेषु। च। त्रिषु। एकापायेन। वर्तन्ते। सहस्राणि। शतानि। च।

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1 Bhashyas
Subject
त्रेता, द्वापर तथा कलियुग का परिमाण
Meaning
(च) और (इतरेषु त्रिषु) शेष अन्य तीन-त्रेता, द्वापर, कलियुगों में (ससंध्येषु ससंध्यांशेषु) 'संध्या' नामक कालों में तथा 'संध्यांश' नामक कालों में (सहस्राणि च शतानि एक-अपायेन) क्रमश: एक हजार और एक-एक सौ घटा देने से (वर्तन्ते) उनका अपना-अपना कालपरिमाण निकल प्राता है अर्थात् ४८०० दिव्यवर्षों का सतयुग होता है, उसकी संख्याओं में एक सहस्र और संध्या व संध्यांश में एक-एक सौ घटाने से ३००० दिव्यवर्ष + ३०० संध्यावष + ३०० संन्ध्यांशवर्ष = ३६०० दिव्यवर्षों का त्रेतायुग होता है । इसी प्रकार - २०००+२०० +२००=२४०० दिव्यवर्षों का द्वापर और १०००+१००+१०० = १२०० दिव्यवर्षों का कलियुग होता है॥७०॥